गूगल की लोकप्रिय वीडियो प्लेटफॉर्म यूट्यूब अब सिर्फ वीडियो देखने और अपलोड करने तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी एक पूरी तरह नया सोशल मीडिया अनुभव तैयार कर रही है, जिसका नाम 'टम्बा' (Tamba) सामने आया है। एंड्रॉयड अथॉरिटी की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक यूट्यूब ऐप के लेटेस्ट वर्जन में छिपे कोड से इस प्रोजेक्ट के कई अहम सुराग मिले हैं। इसमें फॉलोअर्स सिस्टम, प्राइवेट प्रोफाइल, डायरेक्ट मैसेजिंग, ग्रुप चैट और वॉइस रिप्लाई जैसे फीचर शामिल दिख रहे हैं। रिपोर्ट में साफ संकेत हैं कि यह ऐप एंड्रॉयड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर लॉन्च हो सकता है।
यह खबर टेक्नोलॉजी दुनिया में चर्चा का विषय बन गई है क्योंकि यूट्यूब लंबे समय से इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म से प्रतिस्पर्धा कर रही है। शॉर्ट्स फीचर के बाद अब कंपनी सोशल कनेक्शन को और मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है। टम्बा को फिलहाल एक्सपेरिमेंटल या सैंडबॉक्स प्रोजेक्ट माना जा रहा है, लेकिन इसमें मौजूद फीचर इतने विस्तृत हैं कि यह एक अलग सोशल ऐप के रूप में भी आ सकता है।
टम्बा क्या है और कैसे सामने आया?
एंड्रॉयड अथॉरिटी ने यूट्यूब एंड्रॉयड ऐप के वर्जन 21.44.534 का डीप एनालिसिस किया। इस दौरान कोड में 'com.google.android.youtube.sandbox' नाम का एक अलग पैकेज मिला, जो टम्बा ब्रांडिंग के साथ जुड़ा है। इस पैकेज को मुख्य यूट्यूब ऐप अपने से अलग एक स्वतंत्र ऐप की तरह ट्रीट करता है। इसमें खुद की सर्च सजेस्टंस और फाइल प्रोवाइडर्स भी मौजूद हैं।
लोगो एसेट्स में 'yt_sandbox_topbar_logo_white' नाम की फाइल मिली, जिसमें बोल्ड टाइप में 'टम्बा' लिखा है और बीच में प्ले बटन वाला एक स्क्रिबल जैसा डिजाइन है। साथ ही 38 नए आइकॉन भी खोजे गए हैं, जिनमें होम, सर्च, क्रिएट, कैमरा, इनबॉक्स, चैट, स्टिकर, माइक्रोफोन, क्राउन, लॉक और गेम कंट्रोलर जैसे प्रतीक शामिल हैं। कई आइकॉन को 'एक्सपेरिमेंटल' टैग दिया गया है, जो बताता है कि यह प्रोजेक्ट अभी टेस्टिंग फेज में है।
कोड में ANDROID_SANDBOX और IOS_SANDBOX जैसे आइडेंटिफायर भी मिले हैं। इससे साफ है कि गूगल इस ऐप को एंड्रॉयड और आईफोन दोनों पर लाने पर विचार कर रहा है। आंतरिक रूप से इसे 'प्रोजेक्ट सैंडबॉक्स' कहा जा रहा है। सैंडबॉक्स शब्द आमतौर पर उन फीचर के लिए इस्तेमाल होता है जिन्हें सीमित यूजर्स के बीच टेस्ट किया जाता है।
टम्बा में मिलने वाले मुख्य फीचर
टम्बा को देखने से लगता है कि यूट्यूब अब सिर्फ सब्सक्राइबर सिस्टम से आगे बढ़कर असली सोशल नेटवर्किंग की ओर बढ़ रही है। कोड में दर्जनों नोटिफिकेशन टाइप मिले हैं जो सोशल मीडिया ऐप जैसे लगते हैं। इनमें नए फॉलोअर, फॉलो रिक्वेस्ट, फॉलो रिक्वेस्ट अप्रूवल, डायरेक्ट टेक्स्ट मैसेज, ग्रुप चैट में जोड़ा जाना, पोस्ट पर हार्ट और वॉइस नोट या शॉर्ट के जरिए रिप्लाई शामिल हैं।
सबसे अहम बात यह है कि टम्बा में प्राइवेट प्रोफाइल का विकल्प हो सकता है। फॉलो रिक्वेस्ट और उसके अप्रूवल का सिस्टम बताता है कि यूजर्स अपनी प्रोफाइल को लॉक कर सकेंगे और तय कर सकेंगे कि कौन उन्हें फॉलो करे। वर्तमान यूट्यूब में ऐसा फीचर बहुत सीमित है। कुछ स्ट्रिंग्स से संकेत मिलता है कि कोई व्यक्ति ऑनबोर्डिंग पूरा करने से पहले भी फॉलो हो सकता है।
डायरेक्ट मैसेजिंग में फोटो, वीडियो और टेक्स्ट दोनों शेयर किए जा सकेंगे। ग्रुप चैट में शॉर्ट्स सीधे प्ले हो सकेंगे। यानी किसी दोस्त ने ग्रुप में शॉर्ट भेजा तो उसे चैट के अंदर ही देखा जा सकेगा। पोस्ट पर हार्ट रिएक्शन और कमेंट पर वॉइस रिप्लाई का फीचर भी मौजूद दिखता है। ये सारे फीचर मिलकर टम्बा को इंस्टाग्राम जैसा अनुभव देने की क्षमता रखते हैं, लेकिन यूट्यूब के वीडियो इकोसिस्टम के साथ जुड़ा हुआ।
यूट्यूब का सोशल मीडिया पर फोकस क्यों बढ़ रहा है?
यूट्यूब पिछले कुछ सालों में शॉर्ट्स के जरिए शॉर्ट-फॉर्म वीडियो में अच्छी पकड़ बना चुकी है। लेकिन इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म यूजर्स को लंबे समय तक ऐप में रखे रखने में सफल रहे हैं क्योंकि वहां सोशल इंटरैक्शन मजबूत है। यूट्यूब ने हाल ही में मुख्य ऐप में डायरेक्ट मैसेजिंग शुरू किया था, जो 18 साल से ऊपर के यूजर्स के लिए उपलब्ध है। ग्रुप चैट भी कुछ देशों में आने वाले महीनों में रोलआउट होने वाले हैं।
टम्बा इन फीचर को एक कदम आगे ले जाने वाला लगता है। यह या तो अलग ऐप के रूप में आएगा या फिर इसके फीचर धीरे-धीरे मुख्य यूट्यूब ऐप में शामिल हो जाएंगे। गूगल का इतिहास देखें तो कंपनी ने पहले भी गूगल प्लस और स्पेसेस जैसे सोशल एक्सपेरिमेंट किए थे, जो सफल नहीं रहे। इसलिए टम्बा को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है। फिर भी कोड में मौजूद डिटेल इतनी ठोस हैं कि इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूट्यूब क्रिएटर्स को अपने ऑडियंस के साथ और करीब से जुड़ने का मौका देना चाहती है। फॉलोअर्स सिस्टम के जरिए क्रिएटर्स अपनी कम्युनिटी को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकेंगे। प्राइवेट प्रोफाइल और मैसेजिंग फीचर से स्पैम और अनवांटेड इंटरैक्शन भी कम हो सकता है।
एंड्रॉयड और आईओएस दोनों पर लॉन्च की संभावना
कोड में मिले ANDROID_SANDBOX और IOS_SANDBOX आइडेंटिफायर सबसे मजबूत संकेत हैं कि टम्बा दोनों प्रमुख मोबाइल प्लेटफॉर्म के लिए विकसित किया जा रहा है। वर्तमान में यह फीचर यूट्यूब के एंड्रॉयड ऐप में छिपे हुए हैं, लेकिन आईओएस वर्जन के लिए भी तैयारी चल रही है।
फिलहाल कोई आधिकारिक लॉन्च डेट या बीटा टेस्ट की घोषणा नहीं हुई है। गूगल या यूट्यूब ने इस बारे में कोई आधिकारिक बयान भी नहीं दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार यह अभी टेस्टिंग स्टेज में है और सीमित यूजर्स के बीच ट्रायल हो सकता है। अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक चला तो आने वाले महीनों में इसकी और डिटेल सामने आ सकती हैं।
यूजर्स के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या टम्बा एक अलग ऐप होगा या यूट्यूब के अंदर ही एक नया सेक्शन। पैकेज नाम और लोगो देखकर लगता है कि कंपनी इसे स्टैंडअलोन ऐप के रूप में भी सोच रही है। वहीं कुछ फीचर मुख्य ऐप में भी आ सकते हैं।
टम्बा से यूजर्स और क्रिएटर्स को क्या फायदा हो सकता है?
अगर टम्बा सफलतापूर्वक लॉन्च होता है तो आम यूजर्स के लिए यूट्यूब सिर्फ वीडियो प्लेटफॉर्म नहीं रहेगा। वे अपने पसंदीदा क्रिएटर्स को फॉलो कर सकेंगे, उनसे सीधे बात कर सकेंगे और ग्रुप में चर्चा कर सकेंगे। शॉर्ट्स को चैट में शेयर करने से कंटेंट शेयरिंग और आसान हो जाएगी।
क्रिएटर्स के लिए यह एक बड़ा अवसर हो सकता है। वे अपनी कम्युनिटी को बेहतर तरीके से एंगेज कर सकेंगे। प्राइवेट अकाउंट के विकल्प से वे अपनी पसंद के फॉलोअर्स चुन सकेंगे। वॉइस रिप्लाई और पोस्ट पर रिएक्शन से इंटरैक्शन और पर्सनल हो जाएगा।
हालांकि प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा के मुद्दे भी उठ सकते हैं। गूगल पहले से ही यूजर डेटा के इस्तेमाल को लेकर सवालों के घेरे में रहता है। टम्बा जैसे ऐप में सोशल ग्राफ बनने से ये चिंताएं और बढ़ सकती हैं। इसलिए अगर ऐप लॉन्च होता है तो यूजर्स को प्राइवेसी सेटिंग्स पर खास ध्यान देना होगा।
निष्कर्ष: यूट्यूब का 'टम्बा' प्रोजेक्ट सोशल मीडिया स्पेस में कंपनी की महत्वाकांक्षा को दिखाता है। फॉलोअर्स, डीएम, ग्रुप चैट और प्राइवेट प्रोफाइल जैसे फीचर इसे इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म के मुकाबले खड़ा कर सकते हैं। फिलहाल यह एक्सपेरिमेंटल स्टेज में है और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। एंड्रॉयड और आईओएस दोनों पर लॉन्च की संभावना इसे और दिलचस्प बनाती है। यूजर्स और क्रिएटर्स दोनों को इस नए विकास पर नजर रखनी चाहिए क्योंकि यह यूट्यूब के भविष्य को नई दिशा दे सकता है।