युवाओं में बढ़ रही हाई बीपी की समस्या, ज्यादा नमक और कम पानी बड़ा कारण
बदलती जीवनशैली, ज्यादा नमक वाला खान-पान और पर्याप्त पानी न पीने से युवाओं में भी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। जिला अस्पताल में रोज 50-60 मरीज पहुंच रहे हैं, डॉक्टरों ने बचाव के उपाय बताए। समय पर जांच जरूरी।
नमक का सेवन आजकल हाई ब्लड प्रेशर यानी उच्च रक्तचाप की समस्या सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई है। बदलती जीवनशैली और गलत खान-पान की आदतों के कारण युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। खासकर खाने में अधिक नमक का इस्तेमाल और दिनभर पर्याप्त पानी न पीने से शरीर का संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ने लगा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 50 से 60 मरीज हाई बीपी की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। डॉक्टर न सिर्फ इलाज कर रहे हैं, बल्कि बचाव के आसान उपाय भी बता रहे हैं।
अधिक नमक का सेवन सबसे बड़ा जोखिम
डॉक्टर विदित्या चौधरी के अनुसार, लोग रोजमर्रा के खाने में जरूरत से कहीं ज्यादा नमक डालते हैं। फास्ट फूड, पैकेज्ड स्नैक्स, चटपटे चाट-पकौड़े और प्रोसेस्ड फूड में छिपा हुआ नमक इस समस्या को और बढ़ा देता है। नमक में मौजूद सोडियम शरीर में पानी रोकता है, जिससे रक्त की मात्रा बढ़ जाती है और ब्लड प्रेशर ऊपर चढ़ने लगता है। भारत में औसतन लोग WHO की सिफारिश से दोगुना नमक खा रहे हैं, जहां वयस्कों के लिए रोजाना 5 ग्राम से कम नमक की सलाह है। इससे न केवल बीपी बढ़ता है, बल्कि दिल, किडनी और मस्तिष्क पर भी बुरा असर पड़ता है।
कम पानी पीना डिहाइड्रेशन का कारण बन रहा
दिनभर व्यस्तता में लोग पर्याप्त पानी पीना भूल जाते हैं। इससे शरीर में डिहाइड्रेशन हो जाता है, रक्त गाढ़ा हो जाता है और रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ता है। नतीजा ब्लड प्रेशर अनियंत्रित हो जाता है। डॉक्टर बताते हैं कि रोजाना कम से कम 2-3 लीटर पानी पीना चाहिए, खासकर गर्मियों में। पानी की कमी से सोडियम का असर और भी ज्यादा हो जाता है, जो बीपी को तेजी से बढ़ाता है। युवा अक्सर चाय-कॉफी या कोल्ड ड्रिंक्स पर निर्भर रहते हैं, जो डिहाइड्रेशन को और बढ़ावा देते हैं।
जंक फूड और देर रात जागना युवाओं के लिए खतरा
युवा लंबे समय तक मोबाइल, कंप्यूटर या टीवी के सामने बैठे रहते हैं। देर रात तक जागना, नींद की कमी और जंक फूड का सेवन ब्लड प्रेशर बढ़ाने वाले प्रमुख कारण बन गए हैं। जंक फूड में न सिर्फ नमक ज्यादा होता है, बल्कि ट्रांस फैट और कैलोरी भी अधिक होती हैं, जो मोटापा और तनाव बढ़ाते हैं। तनाव से हार्मोन असंतुलित होते हैं, जो बीपी को प्रभावित करते हैं। कई अध्ययनों में पाया गया है कि भारत में 20-30 साल के युवाओं में हाई बीपी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जहां हर पांचवें व्यक्ति को यह समस्या हो सकती है।
अनदेखी करने से गंभीर खतरे
हाई ब्लड प्रेशर को 'साइलेंट किलर' कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते। अगर समय पर जांच न हो तो हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी फेलियर जैसी जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं। डॉक्टर सलाह देते हैं कि 18 साल से ऊपर हर व्यक्ति को नियमित रूप से ब्लड प्रेशर चेक कराना चाहिए। शुरुआती स्टेज में ही जीवनशैली में बदलाव से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
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Chat on WhatsAppनिष्कर्ष: हाई बीपी अब उम्र की बीमारी नहीं रही। ज्यादा नमक कम करें, पानी खूब पिएं, जंक फूड से दूर रहें और नियमित व्यायाम अपनाएं। समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह से युवा भी स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। छोटे बदलाव बड़े खतरे से बचा सकते हैं।
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