दीवाली का त्योहार सिर्फ रोशनी और मिठाइयों का नहीं, बल्कि नई शुरुआत का भी प्रतीक है। कई परिवार इस शुभ अवसर पर नई कार या बाइक खरीदने का सपना पूरा करते हैं। बाजार में त्योहारी ऑफर्स की भरमार है। कंपनियां कैश डिस्काउंट, एक्सचेंज बोनस और फ्री एक्सेसरीज के साथ ग्राहकों को लुभा रही हैं। लेकिन जल्दबाजी में डील फाइनल करने से हजारों रुपये का नुकसान हो सकता है। सही रणनीति अपनाएं तो आप आसानी से 20 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक बचा सकते हैं।
इस साल दीवाली के आसपास कार और बाइक शोरूम में भीड़ बढ़ रही है। टाटा, मारुति, हुंडई, होंडा जैसी कंपनियां आकर्षक ऑफर दे रही हैं। कुछ मॉडलों पर तीन लाख रुपये तक के फायदे भी उपलब्ध हैं। फिर भी सिर्फ ऑफर देखकर खरीदना समझदारी नहीं। डीलरशिप, इंश्योरेंस, लोन और डिलीवरी से जुड़ी छोटी-छोटी बातें कुल खर्च को काफी प्रभावित करती हैं। आइए विस्तार से जानते हैं वे पांच महत्वपूर्ण टिप्स जो आपकी जेब को हल्की होने से बचाएंगी।
टिप 1: कम से कम तीन डीलरशिप से ऑन-रोड कीमत का कोटेशन लें
नई गाड़ी खरीदने का सबसे पहला और सबसे असरदार तरीका है कीमत की तुलना। एक ही मॉडल और वेरिएंट के लिए अपने शहर या आसपास की कम से कम तीन अलग-अलग डीलरशिप से लिखित ऑन-रोड कोटेशन मांगें। ऑन-रोड कीमत में एक्स-शोरूम प्राइस, रजिस्ट्रेशन चार्ज, रोड टैक्स, इंश्योरेंस और अन्य शुल्क शामिल होते हैं। त्योहारी सीजन में कुछ डीलर अतिरिक्त मार्जिन जोड़ देते हैं जबकि कुछ स्टॉक क्लियर करने के लिए ज्यादा छूट देते हैं।
कोटेशन मांगते समय साफ लिखवाएं कि कौन-कौन से आइटम शामिल हैं। कैश डिस्काउंट, एक्सचेंज बोनस, कॉर्पोरेट छूट और एक्सेसरीज पैकेज की अलग-अलग डिटेल लें। कई बार एक डीलर 15-20 हजार रुपये ज्यादा कैश डिस्काउंट ऑफर करता है तो दूसरा बेहतर एक्सचेंज वैल्यू देता है। तीन कोटेशन की तुलना करने के बाद आप मजबूत स्थिति में बातचीत कर सकते हैं। डीलर को बताएं कि आपके पास दूसरे शोरूम का बेहतर ऑफर है। इससे वे अपनी तरफ से अतिरिक्त रियायत देने को तैयार हो जाते हैं।
याद रखें कि त्योहारी ऑफर हर मॉडल पर एक जैसे नहीं होते। कुछ पुराने स्टॉक वाले मॉडल पर ज्यादा छूट मिलती है जबकि नई लॉन्च गाड़ियों पर सीमित फायदा होता है। लिखित कोटेशन जरूर लें ताकि बाद में कोई विवाद न हो। फोन पर बताई गई कीमत और लिखित कीमत में अंतर आना आम बात है। इसलिए हमेशा कागज पर डिटेल मांगें।
टिप 2: इंश्योरेंस प्रीमियम की ऑनलाइन और ऑफलाइन तुलना जरूर करें
नई गाड़ी खरीदते समय इंश्योरेंस कुल खर्च का बड़ा हिस्सा बन जाता है। डीलर अक्सर अपनी पसंदीदा बीमा कंपनी का महंगा प्लान जोड़ देते हैं जिसमें जीरो डेप्रिसिएशन, इंजन प्रोटेक्ट और रिटर्न टू इनवॉइस जैसे राइडर्स शामिल होते हैं। लेकिन यही कवरेज आप बाहर से सस्ते में ले सकते हैं। ऑनलाइन पोर्टल्स पर अलग-अलग कंपनियों के कोटेशन चेक करें। कई मामलों में 15 हजार से 40 हजार रुपये तक की बचत हो जाती है।
अगर आपके पास पुरानी गाड़ी का नो क्लेम बोनस है तो उसे नई पॉलिसी में ट्रांसफर करवाएं। इससे ऑन-डैमेज प्रीमियम पर 20 से 50 प्रतिशत तक छूट मिल सकती है। डीलर को ऑनलाइन मिला सस्ता कोटेशन दिखाकर प्राइस मैच करने के लिए कहें। ज्यादातर डीलर मैच कर देते हैं क्योंकि वे नहीं चाहते कि आप बाहर चले जाएं।
बीमा खरीदते समय कवरेज की डिटेल ध्यान से पढ़ें। सिर्फ सस्ता प्रीमियम देखकर कमजोर पॉलिसी न चुनें। जीरो डेप्रिसिएशन और कंज्यूमेबल कवर जैसी सुविधाएं लंबी अवधि में फायदेमंद साबित होती हैं। कॉर्पोरेट या सरकारी कर्मचारी होने पर अतिरिक्त छूट भी मांगें। कई कंपनियां 5 हजार से 20 हजार रुपये तक की कॉर्पोरेट डिस्काउंट देती हैं।
टिप 3: कार या बाइक लोन लेने से पहले ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और शर्तें चेक करें
ज्यादातर लोग नई गाड़ी लोन पर खरीदते हैं। शोरूम से जुड़े बैंक या एनबीएफसी का ऑफर सबसे आसान लगता है लेकिन हमेशा सबसे सस्ता नहीं होता। अपने मौजूदा बैंक से प्री-अप्रूव्ड लोन ऑफर पहले से चेक करवा लें। अगर आपका सिबिल स्कोर 750 से ऊपर है तो 0.5 से 1 प्रतिशत तक कम ब्याज दर मिल सकती है।
इस साल दीवाली के आसपास कई बैंकों ने आकर्षक ऑफर दिए हैं। कुछ बैंक प्रोसेसिंग फीस पूरी तरह माफ कर रहे हैं तो कुछ फोरक्लोजर चार्ज शून्य रखे हुए हैं। एचडीएफसी, कोटक, पीएनबी जैसी संस्थाओं के ऑफर की तुलना करें। कुल ब्याज खर्च, ईएमआई और लोन अवधि को ध्यान में रखकर फैसला लें। सिर्फ कम ईएमआई देखकर लंबी अवधि का लोन न चुनें क्योंकि कुल ब्याज ज्यादा पड़ सकता है।
लोन डॉक्यूमेंट्स में छिपी शर्तों को ध्यान से पढ़ें। कुछ ऑफर में कैशबैक या लो ईएमआई सिर्फ खास बैंक से फाइनेंस करने पर ही मिलते हैं। अगर आप बाहर से लोन लेते हैं तो डीलर की तरफ से मिलने वाला कैश डिस्काउंट कम हो सकता है। इसलिए दोनों विकल्पों का हिसाब लगाकर ही फैसला करें। डाउन पेमेंट जितना ज्यादा रख सकें उतना बेहतर। इससे ईएमआई हल्की रहती है और ब्याज का बोझ भी कम होता है।
टिप 4: गैरजरूरी एक्सेसरीज और एसेंशियल किट से बचें
शोरूम में कोटेशन देखते समय अक्सर 20 हजार से 35 हजार रुपये की एसेंशियल किट या बेसिक एक्सेसरीज पैकेज जुड़ा होता है। इसमें कारपेट मैट, मड फ्लैप, परफ्यूम, सीट कवर और छोटी-मोटी सजावटी चीजें शामिल होती हैं। ये चीजें बाजार में काफी सस्ती उपलब्ध हैं। डीलर इन्हें ऊंचे दाम पर बेचकर अपना मार्जिन बढ़ाते हैं।
जरूरी एक्सेसरीज जैसे मड गार्ड या बेसिक मैट बाहर से खरीद लें। बाकी चीजें बाद में अपनी पसंद के हिसाब से लगवाएं। कई ग्राहक डीलर के दबाव में पूरी किट ले लेते हैं और बाद में पछताते हैं। कोटेशन से इन गैरजरूरी आइटम को हटवाएं। इससे सीधे 15-30 हजार रुपये की बचत हो जाती है।
अगर डीलर फ्री एक्सेसरीज ऑफर कर रहा है तो उसकी असल कीमत पूछें। कभी-कभी फ्री बताई गई चीजें भी कोटेशन में छिपी होती हैं। लिखित में साफ करवाएं कि कौन सी चीजें मुफ्त हैं और कौन सी पेड। त्योहारी सीजन में डीलर टारगेट पूरा करने के दबाव में होते हैं इसलिए बातचीत की गुंजाइश अच्छी रहती है।
टिप 5: डिलीवरी से पहले पूरी प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन (पीडीआई) जरूर करवाएं
गाड़ी बुक करने के बाद सबसे महत्वपूर्ण चरण है डिलीवरी से पहले की जांच। पीडीआई यानी प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन में गाड़ी की बाहरी-भीतरी स्थिति, इंजन, पेंट, टायर, लाइट्स और सभी फीचर्स की जांच होती है। त्योहारी भीड़ में डीलर जल्दी डिलीवरी करने के चक्कर में छोटी-मोटी खामियों को नजरअंदाज कर सकते हैं।
स्वयं या किसी जानकार के साथ शोरूम जाकर गाड़ी की बारीकी से जांच करें। पेंट पर स्क्रैच तो नहीं, बॉडी पर डेंट तो नहीं, इंजन ऑयल और कूलेंट का स्तर सही है या नहीं, सभी इलेक्ट्रॉनिक फीचर्स काम कर रहे हैं या नहीं। मैन्युफैक्चरिंग मंथ और रजिस्ट्रेशन ईयर भी चेक करें। पुराने स्टॉक वाली गाड़ी पर ज्यादा छूट मिल सकती है लेकिन नई मैन्युफैक्चरिंग वाली गाड़ी लंबी उम्र देती है।
डिलीवरी डॉक्यूमेंट्स जैसे इनवॉइस, इंश्योरेंस पॉलिसी, आरसी और वारंटी कार्ड की डिटेल मिलाकर देखें। कोई भी गलती बाद में परेशानी का कारण बन सकती है। अगर कोई कमी दिखे तो तुरंत सुधार करवाएं। संतुष्ट होने के बाद ही पेमेंट का आखिरी किस्त दें और गाड़ी घर ले जाएं।
अतिरिक्त बचत के कुछ और स्मार्ट तरीके
ऊपर बताए पांच टिप्स के अलावा कुछ और बातें ध्यान में रखें। अगर आपके पास पुरानी गाड़ी है तो एक्सचेंज ऑफर का पूरा फायदा उठाएं। त्योहारी सीजन में एक्सचेंज बोनस सामान्य दिनों से ज्यादा मिलता है। कॉर्पोरेट, आर्मी, टीचर या सरकारी कर्मचारी होने पर अतिरिक्त छूट जरूर मांगें।
ऑनलाइन पोर्टल्स पर भी गाड़ी की कीमत और ऑफर चेक करें। कभी-कभी ऑनलाइन बुकिंग पर अतिरिक्त कैशबैक मिल जाता है। लेकिन फाइनल डील हमेशा डीलरशिप पर ही करें क्योंकि टेस्ट ड्राइव और पीडीआई जरूरी है। बजट तय करते समय सिर्फ गाड़ी की कीमत नहीं बल्कि पांच साल के मेंटेनेंस, फ्यूल और इंश्योरेंस खर्च को भी जोड़ें।
दीवाली के ठीक पहले या धनतेरस के आसपास डील फाइनल करना फायदेमंद हो सकता है क्योंकि डीलर महीने का टारगेट पूरा करने के लिए अतिरिक्त छूट देने को तैयार रहते हैं। लेकिन जल्दबाजी में फैसला न करें। सभी डॉक्यूमेंट और कीमत लिखित में लेकर ही आगे बढ़ें।
निष्कर्ष: दीवाली पर नई कार या बाइक खरीदना खुशी का मौका है लेकिन समझदारी से खरीदारी करें तो बचत भी अच्छी-खासी हो सकती है। तीन डीलरशिप से कीमत तुलना करें, इंश्योरेंस और लोन की बेहतर डील खोजें, गैरजरूरी एक्सेसरीज से बचें और डिलीवरी से पहले पूरी जांच करवाएं। इन पांच टिप्स को अपनाकर आप हजारों रुपये बचा सकते हैं और बिना किसी पछतावे के नई गाड़ी का आनंद ले सकते हैं। शुभ दीवाली और सुरक्षित सफर की शुभकामनाएं!