आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा में अपने सांसद राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर पद से हटा दिया है। उनकी जगह पंजाब के सांसद अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर चड्ढा को सदन में बोलने का समय न देने की भी अनुशंसा की। इस फैसले के एक दिन बाद शुक्रवार को राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश जारी कर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “खामोश करवाया गया हूं, हारा नहीं हूं।”
राघव चड्ढा ने क्या कहा वीडियो में?
वीडियो संदेश में राघव चड्ढा ने आम आदमी और आम आदमी पार्टी दोनों को संबोधित किया। उन्होंने पूछा, “जब भी मुझे संसद में बोलने का मौका मिलता है, तो मैं जनता के मुद्दे उठाता हूं। ऐसे मुद्दे जो आमतौर पर सदन में नहीं उठाए जाते। क्या जनता की समस्याओं पर बात करना कोई अपराध है? क्या मैंने कोई जुर्म किया है?”
चड्ढा ने आगे कहा कि पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को सूचित कर दिया है कि उन्हें बोलने का मौका न दिया जाए। उन्होंने सवाल किया, “क्या मैंने कुछ गलत किया है? अब कोई मुझे क्यों रोकना चाहेगा?”
किन जन मुद्दों को सदन में उठाया राघव चड्ढा ने?
राघव चड्ढा ने अपने संदेश में उन मुद्दों का जिक्र किया जिन्हें उन्होंने संसद में बार-बार उठाया। इनमें एयरपोर्ट पर महंगा खाना, जोमैटो और ब्लिंकिट जैसे प्लेटफॉर्म पर डिलीवरी राइडर्स की परेशानियां, खाने में मिलावट, टोल प्लाजा पर लूट, बैंक चार्जेस की मनमानी, कंटेंट क्रिएटर्स पर मिडिल क्लास का टैक्स बोझ, टेलीकॉम कंपनियों द्वारा 12 महीने में 13 बार रिचार्ज कराने की मजबूरी, डेटा रोलओवर न देने और रिचार्ज खत्म होते ही इनकमिंग बंद करने जैसे मामले शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इन मुद्दों को उठाने से पार्टी को फायदा हुआ, लेकिन क्या इससे नुकसान भी हुआ? फिर क्यों मेरी आवाज बंद करने की कोशिश की जा रही है?
आम आदमी से अपील और आभार
चड्ढा ने आम लोगों को धन्यवाद देते हुए कहा, “आप सब मुझे असीम प्यार देते हैं। जब भी मैं आपके मुद्दे उठाता हूं, आप मुझे समर्थन और प्रोत्साहन देते हैं, मेरा हौसला बढ़ाते हैं। मैं बस आपको धन्यवाद देना चाहता हूं। कृपया मेरा हाथ थामे रखें, इसे मत छोड़ें। मैं आपके साथ हूं और आपके लिए हूं।”
पार्टी पर सवाल और खामोशी का संदेश
उन्होंने उन लोगों को संदेश दिया जिन्होंने उनके बोलने के अधिकार को छीना है। चड्ढा ने कहा, “मेरी खामोशी को हार मत समझिए। मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बन जाता है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि जनता के मुद्दों पर आवाज उठाना उनका कर्तव्य है और इसे कोई नहीं रोक सकता।
यह घटनाक्रम आम आदमी पार्टी के अंदरूनी मतभेदों की चर्चाओं को और तेज कर गया है। पार्टी ने अभी तक इस बदलाव को सामान्य प्रक्रिया बताया है, लेकिन चड्ढा का संदेश साफ संकेत देता है कि वे जनता के मुद्दों पर अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।