सोने-चांदी पर सरकार की 'सर्जिकल स्ट्राइक': क्यों बढ़ाई गई इंपोर्ट ड्यूटी और क्या होगा अब?
भारतीयों का सोने और चांदी के प्रति बेजोड़ लगाव किसी से छिपा नहीं है। लेकिन हाल ही में आए आंकड़ों ने सरकार को एक बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। अप्रैल में सोने और चांदी के रिकॉर्ड आयात के बाद, सरकार ने इन कीमती धातुओं पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी है। जानिए सरकार ने ऐसा क्यों किया और इसका आप पर क्या असर पड़ेगा।
भारतीयों का सोना-चांदी प्रेम और सरकार का बड़ा फैसला
भारत में सोना और चांदी सिर्फ धातुएं नहीं, बल्कि भावनाओं, परंपराओं और निवेश का प्रतीक हैं। चाहे शादी-ब्याह का मौका हो या त्योहार, इन चमकीली धातुओं की खरीदारी हमेशा से भारतीयों की प्राथमिकता रही है। कीमतें चाहे कितनी भी बढ़ें, इस लगाव में कोई कमी नहीं आती। लेकिन, अब सरकार ने कुछ ऐसे कदम उठाए हैं, जिससे आने वाले दिनों में इसकी तस्वीर बदल सकती है।
अप्रैल में आयात का 'धमाका'
वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल अप्रैल के महीने में भारत में सोने का आयात 81.69 प्रतिशत बढ़कर 5.62 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह आंकड़ा इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि इस दौरान सोने की कीमतें अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर के आसपास थीं। सिर्फ सोना ही नहीं, चांदी ने तो और भी तेज रफ्तार पकड़ी है। अप्रैल में चांदी का आयात 157.16 प्रतिशत की भारी बढ़त के साथ 41.1 करोड़ डॉलर रहा।
सरकार का बड़ा कदम: इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी
सोने और चांदी के इस रिकॉर्ड तोड़ आयात को देखते हुए, भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। 13 मई, 2026 की आधी रात से, सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क (Import Duty) को 6% से बढ़ाकर सीधा 15% कर दिया है। इस बढ़ोतरी में 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) शामिल है।
क्यों उठानी पड़ी सरकार को यह कदम?
सरकार के इस फैसले के पीछे कई अहम कारण हैं:
- चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit - CAD): सोने का भारी आयात देश के चालू खाते के घाटे को बढ़ा रहा था, जिसे नियंत्रित करना सरकार की प्राथमिकता है।
- विदेशी मुद्रा भंडार का संरक्षण: बढ़ते आयात के कारण देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा था। सरकार गैर-जरूरी आयात पर अंकुश लगाकर विदेशी मुद्रा को बचाना चाहती है।
- गैर-जरूरी आयात पर अंकुश: सरकार का मानना है कि कीमती धातुओं का आयात एक गैर-जरूरी आयात है, जिसे कम करके अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान की जा सकती है।
- रुपये को मजबूती: डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमत भी एक चिंता का विषय थी। आयात कम होने से रुपये को कुछ हद तक मजबूती मिल सकती है।
- भू-राजनीतिक तनाव: पश्चिम एशिया में चल रहे संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने वैश्विक अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिससे भारत के आयात बिल पर दबाव पड़ रहा है। ऐसे में सरकार आवश्यक आयातों के लिए विदेशी मुद्रा को प्राथमिकता देना चाहती है।
- प्रधानमंत्री की अपील: इस फैसले से कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से एक साल तक सोना खरीदने से बचने की अपील की थी ताकि विदेशी मुद्रा बचाई जा सके।
क्या होगा अब इसका असर?
इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से आम आदमी और बाजार पर कई तरह के असर देखने को मिलेंगे:
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Chat on WhatsApp- सोना-चांदी होगा महंगा: ड्यूटी बढ़ने के बाद घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे खरीदारी महंगी हो जाएगी।
- मांग में कमी की संभावना: ऊंची कीमतों और बढ़ी हुई ड्यूटी के कारण सोने-चांदी की मांग में कुछ कमी आ सकती है।
- तस्करी बढ़ने का खतरा: कई विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि ड्यूटी में भारी बढ़ोतरी से सोने की तस्करी फिर से बढ़ सकती है, जो पहले कम हो गई थी।
- निवेश के पैटर्न में बदलाव: निवेशक अब गोल्ड ETF, म्यूचुअल फंड्स या अन्य वित्तीय विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं।
निष्कर्ष
सरकार का यह कदम देश की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और विदेशी मुद्रा भंडार को संरक्षित करने की दिशा में एक रणनीतिक प्रयास है। भले ही इससे सोने-चांदी के शौकीनों को थोड़ी निराशा हो, लेकिन यह देश की व्यापक आर्थिक स्थिति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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