PM मोदी की अपील से सहमा AIGF: 'सोना नहीं बिका तो 3.5 करोड़ लोगों की रोजी-रोटी खतरे में!'
प्रधानमंत्री मोदी की देशवासियों से सोना न खरीदने की अपील ने अखिल भारतीय जौहरी एवं स्वर्णकार महासंघ (AIGF) को चिंतित कर दिया है। AIGF ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखकर कहा है कि इस अपील से ज्वेलरी इकोसिस्टम से जुड़े 3.5 करोड़ भारतीयों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ सकता है।
PM मोदी की अपील से ज्वेलरी सेक्टर में खलबली
हाल ही में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से लगातार दो दिनों तक सोना न खरीदने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने कंपनियों से 'वर्क फ्रॉम होम' कल्चर को बढ़ावा देने और लोगों से पेट्रोल-डीजल का कम इस्तेमाल करके पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करने की भी बात कही। पीएम मोदी के इन बयानों ने, खासकर सोने से जुड़ी अपील ने, ज्वेलरी सेक्टर में हलचल मचा दी है।
इस अपील के तुरंत बाद, अखिल भारतीय जौहरी एवं स्वर्णकार महासंघ (ALL India Jewellers And Goldsmith Federation - AIJGF) ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को एक पत्र लिखा है। AIJGF का कहना है कि सोने की खरीद टालने की अपील से भारत के विशाल ज्वेलरी इकोसिस्टम से जुड़े लगभग 3.5 करोड़ लोगों की रोजी-रोटी पर गंभीर संकट आ सकता है।
सोने-चांदी की कीमतों में उछाल और AIGF की चिंता
एक तरफ जहां पीएम मोदी सोने की खरीद टालने की अपील कर रहे थे, वहीं MCX पर सोने और चांदी की कीमतों में उछाल देखने को मिला। सुबह 9 बजकर 45 मिनट पर, सोने में 337 रुपये प्रति 10 ग्राम की तेजी दर्ज की गई, जबकि चांदी में 3587 रुपये प्रति किलो का जबरदस्त उछाल आया।
AIJGF ने अपने पत्र में वाणिज्य मंत्री से निवेदन किया है कि सोने की खरीद टालने की अपील से ज्वेलरी इकोसिस्टम से जुड़े 3.5 करोड़ भारतीयों की आजीविका पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है। यह सिर्फ व्यापार का मामला नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के पेट भरने का सवाल है।
AIJGF ने वाणिज्य मंत्री को क्या लिखा?
3.5 करोड़ भारतीयों की आजीविका पर पड़ेगा असर
AIJGF ने पीयूष गोयल को लिखे अपने पत्र में एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि मांग कम करने के बजाय, देश में पड़े बेकार सोने को जुटाने के लिए एक मजबूत बुलियन बैंक फ्रेमवर्क बनाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे भारत को विदेशी मुद्रा बचाने में भी मदद मिलेगी और छोटे ज्वेलर्स, सुनारों, कारीगरों व उनके परिवारों की रोजी-रोटी भी सुरक्षित रहेगी।
क्या आप व्हाट्सऐप पर न्यूज़ अपडेट पाना चाहते हैं?
व्हाट्सऐप पर ताज़ा और भरोसेमंद न्यूज़ अपडेट तुरंत पाएं। अभी जुड़ें और हर खबर सबसे पहले पढ़ें।
Chat on WhatsAppAIJGF ने माननीय वाणिज्य मंत्री जी को पत्र लिखकर निवेदन किया है कि सोना खरीद टालने की अपील से ज्वेलरी इकोसिस्टम से जुड़े 3.5 करोड़ भारतीयों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ सकता है।
पत्र में AIJGF ने कहा है कि demand suppression के बजाय देश में पड़े idle gold को mobilise करने के लिए… pic.twitter.com/jdvoAWwi2K — AIJGF INDIA (@aijgf4india) May 12, 2026
ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा, 'माननीय प्रधानमंत्री द्वारा हाल ही में नागरिकों से एक वर्ष के लिए गैर-जरूरी सोने की खरीद टालने की अपील ने भारत के आभूषण और बुलियन इकोसिस्टम में गंभीर चिंता पैदा कर दी है। AIJGF इस अपील के पीछे की व्यापक आर्थिक चिंताओं को पूरी तरह से समझता है, विशेष रूप से विदेशी मुद्रा के संरक्षण, कच्चे तेल की उच्च कीमतों, वैश्विक अनिश्चितता और भारत के आयात बिल पर पड़ रहे दबाव के संदर्भ में। हालांकि, हम विनम्रतापूर्वक यह कहना चाहते हैं कि सोने की खरीद को हतोत्साहित करने वाली कोई भी व्यापक सार्वजनिक अपील, यदि किसी स्पष्ट संरचनात्मक विकल्प द्वारा समर्थित न हो, तो इसका लगभग 3.5 करोड़ भारतीय नागरिकों और उनके परिवार के सदस्यों की आजीविका पर गंभीर रूप से प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आभूषण उद्योग पर निर्भर हैं।'
केवल सोने का व्यापार नहीं, आजीविका का सवाल है!
AIJGF ने आगे जोर देकर कहा कि यह केवल सोने के व्यापार से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि यह लाखों लोगों की आजीविका का मुद्दा है। भारत का आभूषण क्षेत्र बहुत बड़ा है और यह कई लोगों को सहारा देता है।
- छोटे खुदरा विक्रेता
- पारिवारिक आभूषण दुकानें
- बुलियन डीलर
- कारीगर और सुनार
- पॉलिश करने वाले और रत्न जड़ने वाले
- ट्रांसपोर्टर
- हॉलमार्किंग केंद्र
- रिफाइनर
- थोक विक्रेता और निर्यातक
- डिजाइनर
- दिहाड़ी पर काम करने वाले शिल्पकार और उनके परिवार
इन सभी लोगों का जीवन सीधे तौर पर आभूषण उद्योग पर निर्भर करता है। अगर सोने की खरीद में कमी आती है, तो इन सभी पर सीधा असर पड़ेगा।
छोटे जौहरियों, कारीगरों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा प्रभाव
AIJGF ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मांग में इस तरह की कमी का पहला प्रभाव बड़े संस्थानों पर नहीं पड़ेगा। इसका सबसे ज्यादा असर छोटे जौहरियों, कारीगरों और शिल्पकारों पर पड़ेगा, जिनकी कमाई दैनिक ऑर्डरों, शादी-विवाह के मौसम में होने वाली मांग और मौसमी खरीद पर निर्भर करती है। ये छोटे व्यवसायी ही इस उद्योग की रीढ़ हैं और उन पर पड़ने वाला कोई भी नकारात्मक प्रभाव पूरे इकोसिस्टम को हिला सकता है।
AIJGF का मानना है कि भारत को अपने आभूषण उद्योग को कमजोर करने की आवश्यकता नहीं है। इसके बजाय, भारत को अपने 'गोल्ड मोनेटाइजेशन' (सोने के मौद्रीकरण) से जुड़े तंत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता है, ताकि देश में पड़े सोने का बेहतर उपयोग हो सके और साथ ही लाखों लोगों की आजीविका भी सुरक्षित रहे।