अनिल अंबानी की रिलायंस पावर पर ईडी की गाज, 2032 करोड़ की संपत्ति जब्त
अनिल अंबानी की रिलायंस पावर पर ईडी ने FEMA उल्लंघन केस में 2026 करोड़ के सासन पावर शेयर और 6.16 करोड़ बैंक बैलेंस जब्त किए। पूरा मामला, कंपनी का जवाब और असर जानें।
नई दिल्ली। अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस पावर लिमिटेड पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के कथित उल्लंघन के मामले में एजेंसी ने कंपनी की कुल 2032.81 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करने का आदेश जारी किया है। इसमें कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी सासन पावर लिमिटेड के 2026.65 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर और 6.16 करोड़ रुपये का बैंक बैलेंस शामिल है। यह आदेश 12 अक्टूबर 2026 को जारी हुआ और कंपनी ने 13 अक्टूबर को स्टॉक एक्सचेंजों को इसकी जानकारी दी।
यह कार्रवाई करीब दो दशक पुराने लेन-देन से जुड़ी है। ईडी का आरोप है कि 2006 में जारी फॉरेन करेंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड्स (FCCBs) और 2008 में सिंगापुर स्थित सहायक कंपनी में किए गए विदेशी निवेश में FEMA की धारा 4 का उल्लंघन हुआ। रिलायंस पावर ने इस आरोप से इनकार करते हुए कहा है कि दोनों लेन-देन सभी जरूरी मंजूरियों के साथ किए गए थे। कंपनी के अनुसार यह जब्ती अस्थायी है और सक्षम प्राधिकारी की पुष्टि के अधीन है।
क्या है पूरा मामला और ईडी का आदेश
प्रवर्तन निदेशालय ने FEMA की धारा 37A(1) के तहत सीजर ऑर्डर जारी किया है। इस आदेश के तहत रिलायंस पावर को सासन पावर लिमिटेड के शेयरों और कुछ बैंक बैलेंस को बेचने, ट्रांसफर करने, गिरवी रखने या किसी अन्य तरीके से निपटाने से रोक दिया गया है। कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में साफ कहा है कि कोई जुर्माना नहीं लगाया गया है।
रिलायंस पावर के अनुसार जब्त किए गए सासन पावर के शेयर पहले से ही पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएफसी) के पक्ष में गिरवी रखे हुए हैं। यह गिरवी व्यवस्था 10 साल से ज्यादा समय से चली आ रही है। पीएफसी भारत सरकार का उपक्रम है। कंपनी ने यह भी बताया कि वह आदेश के वित्तीय प्रभावों का आकलन कर रही है और शेयरधारकों तथा अन्य हितधारकों के हितों की रक्षा के लिए उचित कदम उठाएगी।
शेयर बाजार में इस खबर का असर तुरंत दिखा। रिलायंस पावर के शेयरों में करीब दो प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों में चिंता बढ़ गई है क्योंकि अनिल अंबानी समूह की कई कंपनियों पर पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न जांच एजेंसियों की कार्रवाइयां लगातार हो रही हैं।
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Chat on WhatsApp2006 के FCCB और 2008 के सिंगापुर निवेश का इतिहास
रिलायंस पावर ने 2006 में विदेशी मुद्रा में परिवर्तनीय बॉन्ड जारी किए थे। ये बॉन्ड बाद में शेयरों में बदले जा सकते थे। उस समय कंपनी बिजली क्षेत्र में विस्तार के लिए पूंजी जुटाने का प्रयास कर रही थी। 2008 में कंपनी ने सिंगापुर स्थित एक सहायक कंपनी के जरिए विदेशी निवेश भी किया। रिलायंस पावर का दावा है कि इन दोनों लेन-देन के लिए सभी आवश्यक मंजूरी ली गई थी।
ईडी की जांच अब इन पुराने लेन-देन पर केंद्रित है। एजेंसी का मानना है कि इनमें FEMA के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ। कंपनी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह इन आरोपों से असहमत है और जब्ती अस्थायी होने के कारण सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रखेगी।
यह पहली बार नहीं है जब अनिल अंबानी समूह की कंपनियों पर FEMA या अन्य वित्तीय नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे हों। पिछले वर्षों में समूह की विभिन्न कंपनियों पर बैंक ऋण, मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य मामलों में भी जांच चलती रही है। हालांकि इस बार का मामला सिर्फ रिलायंस पावर और उसके सासन प्रोजेक्ट से जुड़ा है।
सासन पावर प्रोजेक्ट क्या है और क्यों महत्वपूर्ण
सासन अल्ट्रा मेगा पावर प्रोजेक्ट (UMPP) मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में स्थित है। यह 3960 मेगावाट क्षमता वाला कोयला आधारित बिजली संयंत्र है जिसमें छह यूनिट हैं, प्रत्येक 660 मेगावाट की। यह दुनिया के सबसे बड़े एकीकृत बिजली उत्पादन और कोयला खनन परियोजनाओं में से एक माना जाता है। इसमें 20 मिलियन टन प्रति वर्ष कोयला उत्पादन की क्षमता भी शामिल है।
सासन पावर लिमिटेड रिलायंस पावर की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। यह प्रोजेक्ट 2013 से 2015 के बीच चरणबद्ध तरीके से चालू हुआ। यह सात राज्यों के बिजली वितरण कंपनियों को बिजली की आपूर्ति करता है और देश के सबसे कम टैरिफ वाली परियोजनाओं में गिना जाता है। करोड़ों उपभोक्ताओं को इससे बिजली मिलती है।
सासन के शेयर पहले से पीएफसी के पास गिरवी होने के कारण जब्ती का व्यावहारिक असर सीमित हो सकता है। फिर भी कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने पर कंपनी की वित्तीय स्थिति और भविष्य की योजनाओं पर प्रभाव पड़ सकता है। रिलायंस पावर हाल के वर्षों में कर्ज कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही है।
अनिल अंबानी समूह पर लगातार दबाव
अनिल अंबानी का रिलायंस समूह पिछले कई वर्षों से वित्तीय संकट और जांच एजेंसियों की कार्रवाइयों का सामना कर रहा है। रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य कंपनियों पर बैंकों के बड़े कर्ज, दिवालिया प्रक्रिया और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले चलते रहे हैं। ईडी ने समूह की कई संपत्तियों को पहले भी अटैच किया है।
इस पृष्ठभूमि में रिलायंस पावर पर हुई ताजा कार्रवाई निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गई है। कंपनी का कहना है कि वह सभी कानूनी कदम उठाएगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सक्षम प्राधिकारी जब्ती की पुष्टि करते हैं तो कंपनी को आगे की कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ सकती है।
बिजली क्षेत्र में निजी कंपनियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। सासन जैसी परियोजनाएं देश की ऊर्जा सुरक्षा में योगदान देती हैं। ऐसे में किसी भी बड़ी कानूनी अड़चन का असर न सिर्फ कंपनी बल्कि बिजली आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल बिजली उत्पादन प्रभावित होने की कोई खबर नहीं है।
RELIANCE POWER DISCLOSES ED SEIZURE ORDER UNDER FEMA SECTION 37A(1), DATED 12 OCT 2026 🔴 The Enforcement Directorate issued an Order of Seizure under Section 37A(1) of FEMA, received by the company on 12 Oct 2026 🔴 What it covers, per the company: the seizure primarily pertains to the shares Reliance Power holds in its wholly owned subsidiary Sasan Power Limited, plus certain bank balances of the company 🟡 Company's position: the order relates to foreign currency convertible bonds issued in 2006 and an overseas investment made in 2008 in a Singapore subsidiary, "with all applicable approvals". It says the Sasan Power shares have already been pledged in favour of Power Finance Corporation for more than 10 years 🟡 The filing does not state the amount seized or the company's planned response. Redbox also reported the ED action on the morning of 14 Oct Source: Reliance Power NSE filing (Regulation 30(13), Form A), 13 Oct 2026, late evening. Not SEBI advice. DYOR. #ReliancePower #ED #FEMA — Willow Whispers (@willowwhis22170) October 14, 2026
कंपनी का रुख और आगे की राह
रिलायंस पावर ने अपने आधिकारिक बयान में दो बातें साफ कही हैं। पहली, सभी लेन-देन मंजूरियों के साथ किए गए थे। दूसरी, जब्ती अस्थायी है और पुष्टि के अधीन है। कंपनी ने कहा कि वह शेयरधारकों और अन्य हितधारकों के हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगी।
बाजार में अभी इंतजार है कि सक्षम प्राधिकारी इस मामले में क्या फैसला लेते हैं। अगर जब्ती की पुष्टि हो जाती है तो कंपनी को अदालत का रुख करना पड़ सकता है। दूसरी ओर अगर कंपनी अपना पक्ष साबित कर लेती है तो यह आदेश रद्द भी हो सकता है।
निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे कंपनी के आधिकारिक अपडेट्स पर नजर रखें। स्टॉक की चाल आगे की खबरों पर निर्भर करेगी। अनिल अंबानी समूह की अन्य कंपनियों में भी इसी तरह की खबरें आती रही हैं इसलिए पूरे समूह पर नजर रखना जरूरी है।
निष्कर्ष: ईडी की इस कार्रवाई ने रिलायंस पावर और अनिल अंबानी समूह पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। दो दशक पुराने लेन-देन को लेकर हुई यह जब्ती कंपनी के लिए नई चुनौती है। कंपनी का दावा है कि सब कुछ नियमों के मुताबिक हुआ था। अब आगे की कानूनी प्रक्रिया तय करेगी कि यह मामला किस दिशा में जाता है। निवेशकों और बाजार को कंपनी के अगले कदमों का इंतजार रहेगा।