सिर्फ मैं, क्रिकेट और परिवार: पृथ्वी शॉ का नया सफर, टीम इंडिया वापसी का लक्ष्य

पृथ्वी शॉ ने बताया कि अब सोशल मीडिया से दूर रहकर सिर्फ क्रिकेट, परिवार और खुद पर फोकस कर रहे हैं। टीम इंडिया में वापसी उनका सबसे बड़ा लक्ष्य। जानें पूरी बात।

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Oct 15, 2026 • 7:00 PM  0  0
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21 days ago
सिर्फ मैं, क्रिकेट और परिवार: पृथ्वी शॉ का नया सफर, टीम इंडिया वापसी का लक्ष्य
पृथ्वी शॉ ने बताया कि अब सोशल मीडिया से दूर रहकर सिर्फ क्रिकेट, परिवार और खुद पर फोकस कर रहे हैं। टीम इंडिया में वापसी उनका सबसे बड़ा लक्ष्य। जानें पूरी बात।
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सिर्फ मैं, क्रिकेट और परिवार: पृथ्वी शॉ का नया सफर, टीम इंडिया वापसी का लक्ष्य
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नई दिल्ली। एक समय भारतीय क्रिकेट का सबसे चमकदार युवा सितारा माने जाने वाले पृथ्वी शॉ आज एक अलग राह पर चल रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में फॉर्म, फिटनेस, अनुशासन और व्यक्तिगत चुनौतियों से जूझने के बाद अब 26 वर्षीय बल्लेबाज ने अपनी जिंदगी का पूरा फोकस तीन चीजों पर केंद्रित कर दिया है—खुद पर, क्रिकेट पर और परिवार पर। इंडिया टुडे से हुई बातचीत में उन्होंने साफ कहा कि सोशल मीडिया से दूरी बना ली है और पहले से कहीं ज्यादा मेहनत कर रहे हैं। उनका सबसे बड़ा सपना अब भी टीम इंडिया में वापसी का है।

शॉ ने महाराष्ट्र की कप्तानी संभालते हुए हाल ही में रणजी ट्रॉफी में अच्छा प्रदर्शन किया है। सर्विसेज के खिलाफ मैच में उन्होंने महत्वपूर्ण रन बनाए और टीम को जीत दिलाई। इस प्रदर्शन के बीच उन्होंने अपने नए जीवन दर्शन को साझा किया।

सोशल मीडिया से दूरी और निजी स्थान का महत्व

पृथ्वी शॉ ने स्वीकार किया कि अब वे बाहर निकलने से बचते हैं। पपराजी और सार्वजनिक ध्यान उन्हें परेशान करता है। वे कहते हैं, “मैं पहले से कहीं ज्यादा मेहनत कर रहा हूं। इस समय मैं सोशल मीडिया पर ज्यादा सक्रिय नहीं हूं। बस खुद पर काम कर रहा हूं। सिर्फ मैं, मेरा क्रिकेट और मेरा परिवार। इन्हीं तीन चीजों पर ध्यान दे रहा हूं। बाकी सब को नजरअंदाज करने की कोशिश कर रहा हूं।”

वे परिवार के साथ डिनर पर तो जाते हैं लेकिन सार्वजनिक जगहों पर ज्यादा समय नहीं बिताते। निजी स्थान को अब वे बहुत अहमियत देते हैं। कैमरे और निरंतर सुर्खियां उन्हें असहज करती हैं। शॉ का मानना है कि बाहर की टिप्पणियां मायने नहीं रखतीं। महत्वपूर्ण यह है कि वे खुद कैसे इंसान हैं और परिवार उनके बारे में क्या सोचता है।

यह बदलाव आसान नहीं रहा। एक खिलाड़ी जिसकी हर गतिविधि सुर्खियों में रहती थी, उसके लिए शोर को नजरअंदाज करना चुनौतीपूर्ण है। लेकिन अब वे साफ तौर पर कहते हैं कि वे पीछे नहीं मुड़कर देखते। गलतियां हुई होंगी, लेकिन जीवन में कोई भी सौ फीसदी सही नहीं होता। अब उनका पूरा ध्यान आगे बढ़ने पर है।

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टीम इंडिया में वापसी—‘यह मेरी खुद से लड़ाई है’

पृथ्वी शॉ ने भारत के लिए पांच टेस्ट, छह वनडे और एक टी20 मैच खेले हैं। लेकिन 2021 के बाद से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर रहे। मुंबई टीम से बाहर होना, आईपीएल में चुनौतियां और फॉर्म की निरंतरता पर सवाल—इन सबने उनके करियर को प्रभावित किया। फिर भी उनका लक्ष्य साफ है।

शॉ कहते हैं, “अगर यह लक्ष्य नहीं होता तो मैं आज क्रिकेट भी नहीं खेल रहा होता। सबसे बड़ा लक्ष्य भारतीय टीम में वापसी का है। यह किसी को कुछ साबित करने की बात नहीं है। यह मेरी खुद से लड़ाई है। बस और कुछ नहीं।”

वे समझते हैं कि ओपनर की जगह के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा है। निरंतर प्रदर्शन ही रास्ता खोल सकता है। महाराष्ट्र में कप्तानी और रणजी ट्रॉफी में अच्छा फॉर्म उन्हें नई उम्मीद दे रहा है। पिछले सीजन में उन्होंने कई महत्वपूर्ण पारी खेली थीं। अब वे वर्क एथिक पर और ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

पीएस5 और कमरे में बिताया समय—नया रूटीन

मैदान से बाहर शॉ का जीवन अब बहुत सरल हो गया है। वे होटल रूम में ज्यादा समय बिताते हैं। नेटफ्लिक्स देखते हैं और प्लेस्टेशन खेलते हैं। खास बात यह कि वे क्रिकेट के करियर मोड में खुद को चुनते हैं। असली मैच में अगर कम स्कोर पर आउट हो जाएं तो गेम में जाकर 400-500 रन बना लेते हैं। यह उनके लिए मोटिवेशन का स्रोत बन गया है।

वे जीटीए, फीफा और टेक्केन भी खेलते हैं। फीफा में वे काफी अच्छे हैं। यह रूटीन उन्हें शोर से दूर रखता है और मानसिक रूप से तरोताजा रखता है। वे कहते हैं कि दिन भर क्रिकेट और टीम के साथ रहने के बाद रात को कमरे में पीएस5 खेलना उनका तरीका है खुद को रिचार्ज करने का।

अतीत की चुनौतियां और नई शुरुआत

पृथ्वी शॉ के करियर में कई उतार-चढ़ाव आए। युवावस्था में वे भारतीय क्रिकेट का भविष्य माने जाते थे। लेकिन चोटें, फिटनेस के सवाल, अनुशासन संबंधी चर्चाएं और व्यक्तिगत जीवन की सुर्खियां उनके रास्ते में आईं। मुंबई से अलग होने के बाद महाराष्ट्र ने उन्हें नया मौका दिया। अब वे वहां कप्तानी भी कर रहे हैं।

वे स्वीकार करते हैं कि गलतियां हुई होंगी। लेकिन अब वे अतीत में उलझे नहीं रहना चाहते। परिवार का साथ और खुद पर भरोसा उनके लिए सबसे बड़ी ताकत है। वे कहते हैं कि परिवार की सोच और खुद का चरित्र ही मायने रखता है। बाहरी आलोचनाओं को वे अब गंभीरता से नहीं लेते।

रणजी ट्रॉफी में महाराष्ट्र की शुरुआत अच्छी रही। सर्विसेज के खिलाफ जीत और व्यक्तिगत योगदान ने दिखाया कि वे फॉर्म में लौट रहे हैं। कप्तानी के दौरान उन्होंने नेतृत्व के गुण भी दिखाए। यह सब उनके नए फोकस का नतीजा लगता है।

क्रिकेट, परिवार और मेहनत—तीन स्तंभ

शॉ का नया जीवन दर्शन बहुत साफ है। वे टीममेट्स के साथ समय बिताना चाहते हैं, क्रिकेट पर पूरा ध्यान देना चाहते हैं और परिवार को प्राथमिकता देते हैं। वर्क एथिक को मजबूत बनाना उनके लिए जरूरी है। वे मानते हैं कि सही मेहनत और निरंतरता ही उन्हें वापस ऊंचाई पर ले जा सकती है।

सोशल मीडिया से दूरी ने उन्हें मानसिक शांति दी है। पहले जहां हर पोस्ट और कमेंट उनके दिमाग में रहता था, अब वे उस शोर से मुक्त हैं। यह बदलाव उनके प्रदर्शन में भी दिखाई दे रहा है। वे अब सिर्फ खेलने और सुधारने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

भारतीय क्रिकेट में ओपनर की जगह हमेशा प्रतिस्पर्धी रही है। युवा खिलाड़ी लगातार उभर रहे हैं। ऐसे में शॉ को निरंतर रन बनाने होंगे। वे जानते हैं कि एक या दो अच्छी पारियां काफी नहीं। लंबे समय तक अच्छा प्रदर्शन ही चयनकर्ताओं का ध्यान खींचेगा।

निष्कर्ष: पृथ्वी शॉ आज एक परिपक्व खिलाड़ी की तरह सोच रहे हैं। गलतियों से सीखकर उन्होंने जीवन का तरीका बदल लिया है। सिर्फ खुद, क्रिकेट और परिवार—इन तीन चीजों पर फोकस करके वे टीम इंडिया में वापसी का सपना पूरा करना चाहते हैं। उनका सफर अभी जारी है और क्रिकेट प्रेमी उनके अगले अध्याय का इंतजार कर रहे हैं।

Frequently Asked Questions 5

वे शोर और बाहरी टिप्पणियों से दूर रहना चाहते हैं ताकि पूरा ध्यान क्रिकेट, परिवार और खुद पर लगा सकें।

हां, उन्होंने साफ कहा है कि यह उनका सबसे बड़ा लक्ष्य है और अगर यह लक्ष्य न होता तो वे आज क्रिकेट नहीं खेल रहे होते।

वे महाराष्ट्र के लिए खेल रहे हैं और हाल में रणजी ट्रॉफी में टीम की कप्तानी भी कर रहे हैं।

उन्होंने भारत के लिए 5 टेस्ट, 6 वनडे और 1 टी20 मैच खेले हैं।

वे ज्यादातर कमरे में रहते हैं, प्लेस्टेशन खेलते हैं, नेटफ्लिक्स देखते हैं और परिवार के साथ समय बिताते हैं।

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