टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का 'चिप' दांव: ASML के साथ मिलकर भारत में बनेगा पहला सेमीकंडक्टर प्लांट!

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और नीदरलैंड की दिग्गज कंपनी ASML भारत में पहला सेमीकंडक्टर फैब प्लांट स्थापित करने के लिए एक साथ आए हैं। यह गुजरात के धोलेरा में बनेगा और भारत को चिप निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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Web Desk Verified Public Figure • 05 Aug, 2014 Chief Editor
May 17, 2026 • 4:42 PM  1  0
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टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का 'चिप' दांव: ASML के साथ मिलकर भारत में बनेगा पहला सेमीकंडक्टर प्लांट!
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और नीदरलैंड की दिग्गज कंपनी ASML भारत में पहला सेमीकंडक्टर फैब प्लांट स्थापित करने के लिए एक साथ आए हैं। यह गुजरात के धोलेरा में बनेगा और भारत को चिप निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का 'चिप' दांव: ASML के साथ मिलकर भारत में बनेगा पहला सेमीकंडक्टर प्लांट!
टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स

भारत में चिप क्रांति: टाटा और ASML की धमाकेदार साझेदारी!

अरे वाह! भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में एक बहुत बड़ी खबर आई है। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और नीदरलैंड की जानी-मानी सेमीकंडक्टर इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग कंपनी ASML ने हाथ मिलाया है। लक्ष्य है भारत में पहला सेमीकंडक्टर फैब प्लांट बनाना! यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान घोषित किया गया था, और तब से इस पर तेजी से काम हो रहा है।

धोलेरा में सजेगी नई कहानी!

यह शानदार प्लांट गुजरात के धोलेरा में बनेगा, और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स इसमें करीब ₹91,000 करोड़ (लगभग $11 बिलियन) का बड़ा निवेश कर रही है। सोचिए, इतनी बड़ी रकम से क्या कुछ नहीं होगा! ASML इस प्लांट को स्थापित करने और चलाने में पूरी मदद करेगी। ये कंपनी छोटी से छोटी सेमीकंडक्टर चिप बनाने वाली लिथोग्राफी मशीनों की दुनिया की सबसे बड़ी मैन्युफैक्चरर है, इसलिए इनकी मदद गेम चेंजर साबित होगी।

क्या होगा इस प्लांट में खास?

  • क्षमता: धोलेरा में बनने वाला यह प्लांट हर महीने 50,000 वेफर्स बनाने की क्षमता रखेगा।
  • टेक्नोलॉजी: यहां 28nm से 110nm टेक्नोलॉजी पर आधारित एनालॉग और लॉजिक IC चिप्स बनेंगे।
  • उत्पादन लक्ष्य: अच्छी खबर ये है कि इस प्लांट से पहला सेमीकंडक्टर चिप दिसंबर 2026 तक बाजार में आने की उम्मीद है।
  • ASML की भूमिका: ASML अपनी अत्याधुनिक लिथोग्राफी मशीनों और समाधानों के साथ इस 300 मिलीमीटर (12 इंच) फैब को तैयार करने में मदद करेगी।

भारत के लिए क्यों है यह इतना बड़ा कदम?

यह सिर्फ एक प्लांट नहीं, बल्कि भारत के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। अभी तक हमें चिप्स के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब हम खुद अपनी चिप्स बनाएंगे। इससे ऑटोमोटिव, मोबाइल डिवाइस, AI, टेलीकॉम, डिफेंस और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कई सेक्टरों को फायदा होगा। केंद्र सरकार ने भी इस प्रोजेक्ट को पूरा समर्थन दिया है, धोलेरा में टाटा सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड के लिए एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) को मंजूरी दी गई है, जो लगभग 66 हेक्टेयर में फैला होगा। सरकार इस परियोजना की कुल लागत का 70% तक वहन कर रही है (केंद्र सरकार 50% और गुजरात सरकार 20%)।

रोजगार और भविष्य की संभावनाएं

इस प्रोजेक्ट से देश में लगभग 21,000 नई नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है। यह न केवल तकनीकी विकास को बढ़ावा देगा, बल्कि स्थानीय प्रतिभाओं को प्रशिक्षण और कौशल विकास के अवसर भी मिलेंगे, खासकर लिथोग्राफी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में। टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स गुजरात के धोलेरा में ताइवान की PSMC के साथ मिलकर भी काम कर रही है, जो इस फैब की क्षमता को और बढ़ाएगा। इसके अलावा, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स असम के जगीरोड में एक सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट यूनिट भी बना रही है, जो दिसंबर 2026 तक चालू होने की उम्मीद है।

तो दोस्तों, भारत अब सेमीकंडक्टर की दुनिया में अपनी धाक जमाने को तैयार है। यह साझेदारी देश के तकनीकी भविष्य के लिए एक नई सुबह लेकर आई है!

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