DGCA ने MOBIKINS पावर बैंक पर फ्लाइट में पूरी रोक लगाई, जानें जरूरी बातें

DGCA ने MOBIKINS MK-PB-04 पावर बैंक को सभी फ्लाइट्स में बैन कर दिया। दिल्ली-चेन्नई इंडिगो फ्लाइट में आग लगने के बाद यह फैसला। यात्री ध्यान रखें ये नियम।

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Oct 14, 2026 • 11:47 AM  2  0
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23 days ago
DGCA ने MOBIKINS पावर बैंक पर फ्लाइट में पूरी रोक लगाई, जानें जरूरी बातें
DGCA ने MOBIKINS MK-PB-04 पावर बैंक को सभी फ्लाइट्स में बैन कर दिया। दिल्ली-चेन्नई इंडिगो फ्लाइट में आग लगने के बाद यह फैसला। यात्री ध्यान रखें ये नियम।
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DGCA ने MOBIKINS पावर बैंक पर फ्लाइट में पूरी रोक लगाई, जानें जरूरी बातें
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मोबाइल की बैटरी खत्म हो जाने पर पावर बैंक काफी काम आता है, लेकिन यही डिवाइस आपकी हवाई यात्रा के वक्त खतरा भी बन सकता है। हाल ही में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन यानी डीजीसीए ने MOBIKINS MK-PB-04 मॉडल के पावर बैंक को फ्लाइट्स में ले जाने पर पूरी तरह बैन लगा दिया है। इस डिवाइस को अब न तो केबिन बैगेज में ले जाने की अनुमति होगी और न ही इसे चेक-इन लगेज या कार्गो में ले जाया जा सकता है। यह फैसला दिल्ली से चेन्नई जा रही इंडिगो की एक फ्लाइट में पावर बैंक में आग लगने की घटना के बाद लिया गया है। विमान को हैदराबाद डायवर्ट करना पड़ा और इमरजेंसी लैंडिंग करवानी पड़ी। ऐसे में ये जानना जरूरी है कि आखिर पावर बैंक में आग क्यों लगती है और सफर के दौरान इससे बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखें।

यात्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डीजीसीए ने सख्त कदम उठाया है। यह घटना सिर्फ एक मॉडल तक सीमित नहीं है बल्कि लिथियम बैटरी वाले उपकरणों से जुड़े खतरों की बड़ी तस्वीर पेश करती है। दुनिया भर में ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं और भारत में भी पिछले एक साल में कई बार पावर बैंक से जुड़ी समस्याएं सामने आई हैं।

इंडिगो फ्लाइट में क्या हुआ था

11 अक्टूबर 2026 को दिल्ली से चेन्नई जा रही इंडिगो फ्लाइट 6ई 6115 में एक यात्री के पावर बैंक में आग लग गई। यह पावर बैंक ओवरहेड स्टोरेज बिन में रखा हुआ था। केबिन में धुआं भर गया और यात्रियों में हड़कंप मच गया। कुछ यात्रियों ने बैग और कपड़ों से आग बुझाने की कोशिश की। क्रू सदस्यों ने तुरंत फायर एक्सटिंगुशर का इस्तेमाल किया और स्थिति को काबू में किया। पायलटों ने सुरक्षा प्रोटोकॉल के अनुसार विमान को हैदराबाद के राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर डायवर्ट कर दिया। विमान सुरक्षित उतर गया और किसी यात्री या क्रू को गंभीर चोट नहीं आई।

फ्लाइट में करीब 180 यात्री और सात क्रू सदस्य सवार थे। एयरबस ए321 नियो विमान दिल्ली से दोपहर करीब डेढ़ बजे उड़ा था और चेन्नई पहुंचना था। घटना के बाद वैकल्पिक विमान की व्यवस्था की गई ताकि यात्री अपनी यात्रा पूरी कर सकें। इंडिगो ने कहा कि सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है और यात्रियों को हुए असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया। इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैले जिसमें केबिन में तनाव साफ दिखाई दे रहा था।

डीजीसीए प्रमुख वीर विक्रम यादव के आदेश में साफ कहा गया कि यात्रा करने वाले लोगों और एयरलाइंस दोनों को सुनिश्चित करना होगा कि MOBIKINS MK-PB-04 पावर बैंक किसी भी उड़ान में न ले जाया जाए। यह प्रतिबंध घरेलू, अंतरराष्ट्रीय और कार्गो उड़ानों सभी पर लागू है। एयरलाइंस को यात्रियों तक यह सलाह पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

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पावर बैंक में आग क्यों लगती है

पावर बैंक में लिथियम-आयन बैटरी होती है। ये बैटरियां उच्च ऊर्जा घनत्व के कारण लोकप्रिय हैं लेकिन इनमें थर्मल रनअवे का खतरा रहता है। थर्मल रनअवे एक रासायनिक प्रतिक्रिया है जिसमें बैटरी अचानक बहुत गर्म हो जाती है और खुद को जलाती रहती है। बाहरी ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ती। ओवरचार्जिंग, शॉर्ट सर्किट, खराब मैन्युफैक्चरिंग, पुरानी बैटरी, दबाव या तापमान में बदलाव से यह समस्या हो सकती है।

हवाई जहाज में दबाव और तापमान का अंतर इस खतरे को बढ़ा देता है। ओवरहेड बिन में रखने से आग का पता देर से लगता है क्योंकि वह जगह आसानी से नजर नहीं आती। अगर आग कार्गो होल्ड में लगे तो स्थिति और गंभीर हो सकती है क्योंकि वहां पहुंच मुश्किल होती है। यही वजह है कि डीजीसीए और वैश्विक नियम पावर बैंक को केबिन में ही रखने पर जोर देते हैं।

पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में कई घटनाएं हो चुकी हैं। भारत में भी मई 2026 में चंडीगढ़ में इंडिगो फ्लाइट लैंडिंग के बाद पावर बैंक में आग लगी थी। उससे पहले दिल्ली में टैक्सीिंग के दौरान भी ऐसी घटना हुई। ये घटनाएं बताती हैं कि लिथियम बैटरी वाले उपकरणों के साथ सावधानी बरतना कितना जरूरी है।

डीजीसीए के मौजूदा नियम क्या कहते हैं

डीजीसीए ने नवंबर 2025 में डेंजरस गुड्स एडवाइजरी जारी की थी। इसमें साफ निर्देश हैं कि पावर बैंक और स्पेयर लिथियम बैटरी केवल हैंड बैगेज यानी केबिन बैगेज में ही ले जाई जा सकती हैं। चेक-इन लगेज में ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। ओवरहेड बिन में रखने की अनुमति नहीं है। उन्हें यात्री के पास या सीट के नीचे रखना चाहिए ताकि कोई समस्या होने पर तुरंत पता चल सके।

फ्लाइट के दौरान पावर बैंक का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना है। न तो इससे फोन या अन्य डिवाइस चार्ज करें और न ही एयरक्राफ्ट की सीट पावर सप्लाई से पावर बैंक चार्ज करें। क्षमता की सीमा आमतौर पर 100 वॉट-ऑवर तक बिना अनुमति के है। 100 से 160 वॉट-ऑवर वाले पावर बैंक के लिए एयरलाइन की पूर्व अनुमति जरूरी हो सकती है। इससे अधिक क्षमता वाले पूरी तरह बैन हैं। ज्यादातर एयरलाइंस अधिकतम दो पावर बैंक प्रति यात्री की अनुमति देती हैं।

शॉर्ट सर्किट से बचाव के लिए बैटरी टर्मिनल्स को टेप से ढकें या प्रोटेक्टिव केस में रखें। अगर कोई डिवाइस गरम हो, धुआं निकाले या अजीब गंध आए तो तुरंत क्रू को सूचित करें। एयरलाइंस को इन नियमों की घोषणा केबिन में करनी होती है और सभी घटनाओं की रिपोर्ट डीजीसीए को देनी होती है।

यात्रियों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

यात्रा से पहले अपने पावर बैंक की मॉडल और क्षमता जांच लें। अगर आपके पास MOBIKINS MK-PB-04 है तो उसे घर पर ही छोड़ दें। अन्य पावर बैंक को केबिन बैग में रखें और ओवरहेड में न डालें। फ्लाइट के दौरान इसे इस्तेमाल न करें। सुरक्षा जांच के समय नियमों का पालन करें। अगर कोई संदेह हो तो एयरलाइन की वेबसाइट या हेल्पलाइन से संपर्क करें।

अच्छी क्वालिटी वाले और प्रमाणित पावर बैंक ही खरीदें। सस्ते या नकली उत्पादों में खतरा ज्यादा होता है। बैटरी को नियमित रूप से चेक करें कि उसमें सूजन तो नहीं है। पुराने या डैमेज्ड पावर बैंक को फ्लाइट में ले जाना खतरनाक है। यात्रा के दौरान मोबाइल को एयरक्राफ्ट मोड में रखें और जरूरत से ज्यादा चार्जिंग से बचें।

एयरलाइंस भी सतर्क हो गई हैं। ग्राउंड स्टाफ और सिक्योरिटी टीम को खास मॉडल की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं। यात्रियों को चेक-इन और बोर्डिंग के समय सलाह दी जा रही है। नेपाल एयरलाइंस जैसी कंपनियों ने भी भारत से आने-जाने वाली उड़ानों में इस मॉडल पर रोक लगा दी है।

वैश्विक स्तर पर आईसीएओ और अन्य नियामक भी लिथियम बैटरी के नियमों को सख्त कर रहे हैं। कई देशों में पावर बैंक की संख्या और क्षमता सीमित की गई है। भारत में भी एविएशन मंत्रालय इस मुद्दे पर काम कर रहा है ताकि केबिन बैग को कार्गो में रखने जैसी स्थितियों से बचा जा सके।

लिथियम बैटरी का खतरा और सुरक्षा के उपाय

लिथियम-आयन बैटरी आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स की रीढ़ हैं लेकिन उनमें ऊर्जा इतनी ज्यादा होती है कि छोटी सी खराबी बड़ी आग का रूप ले सकती है। थर्मल रनअवे शुरू होने पर तापमान सैकड़ों डिग्री तक पहुंच जाता है। पानी से बुझाना मुश्किल होता है इसलिए खास तरह के फायर सप्रेसेंट इस्तेमाल किए जाते हैं। केबिन क्रू को इन घटनाओं से निपटने का प्रशिक्षण दिया जाता है।

यात्रियों को चाहिए कि वे डिवाइस को सीधे धूप या गर्मी से दूर रखें। चार्जिंग के दौरान निगरानी रखें। फ्लाइट से पहले बैटरी को पूरी तरह चार्ज न करें बल्कि 50-80 प्रतिशत के आसपास रखें। प्रोटेक्टिव पाउच का इस्तेमाल करें। अगर पावर बैंक गरम महसूस हो तो उसे तुरंत बंद करें और सुरक्षित जगह रखें।

पिछली घटनाओं से सबक लेते हुए एयरलाइंस ने घोषणाओं को मजबूत किया है। अब फ्लाइट में बार-बार याद दिलाया जाता है कि पावर बैंक का इस्तेमाल न करें। सुरक्षा जांच में भी ज्यादा सतर्कता बरती जा रही है। यात्री अगर नियमों का पालन करते हैं तो जोखिम काफी कम हो जाता है।

डीजीसीए का यह कदम यात्री सुरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। एक मॉडल पर बैन लगाना बाकी उत्पादों के लिए चेतावनी भी है। मैन्युफैक्चरर्स को गुणवत्ता पर ध्यान देना होगा और यात्रियों को जागरूक रहना होगा। हवाई यात्रा सुविधाजनक तभी रहती है जब सुरक्षा को सर्वोपरि रखा जाए।

निष्कर्ष: MOBIKINS MK-PB-04 पर लगा बैन याद दिलाता है कि छोटी सी लापरवाही बड़ी समस्या बन सकती है। पावर बैंक ले जाते समय नियमों का सख्ती से पालन करें, ओवरहेड बिन में न रखें, फ्लाइट में इस्तेमाल न करें और किसी भी असामान्य स्थिति में तुरंत क्रू को बताएं। सुरक्षित यात्रा ही सुखद यात्रा होती है।

Frequently Asked Questions 5

नहीं। केवल MOBIKINS MK-PB-04 मॉडल पूरी तरह बैन है। अन्य पावर बैंक केबिन बैगेज में नियमों के साथ ले जा सकते हैं।

आग लगने पर जल्दी पता नहीं चलता और बुझाने में देरी होती है। इसलिए इसे यात्री के पास रखना जरूरी है।

नहीं। डीजीसीए नियमों के अनुसार फ्लाइट के दौरान पावर बैंक का कोई भी इस्तेमाल प्रतिबंधित है।

आमतौर पर 100 वॉट-ऑवर तक बिना अनुमति। 100-160 वॉट-ऑवर के लिए एयरलाइन अनुमति जरूरी हो सकती है।

नहीं। केवल केबिन बैगेज में अनुमति है।

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