नई दिल्ली। बजट सत्र के विस्तार के तहत सरकार द्वारा बुलाए गए तीन दिवसीय विशेष सत्र के पहले दिन गुरुवार 16 अप्रैल 2026 को लोकसभा में महिला आरक्षण कानून से जुड़े तीन बिलों पर चर्चा शुरू हुई। इस दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला और महिला आरक्षण को लेकर सवाल उठाया।

अखिलेश का सवाल: भाजपा शासित राज्यों में महिला मुख्यमंत्री की संख्या?

चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने सीधे भाजपा पर निशाना साधते हुए पूछा, “भाजपा-शासित राज्यों में कितनी महिला मुख्यमंत्री हैं?” उन्होंने कहा कि भाजपा महिलाओं के नाम पर एजेंडा आगे बढ़ाना चाहती है, लेकिन अपने संगठन और शासित राज्यों में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं देती। अखिलेश ने आरोप लगाया कि जिस पार्टी ने अपने संगठन में महिलाओं को उचित स्थान नहीं दिया, वह उनकी गरिमा और सम्मान कैसे सुनिश्चित करेगी?

महिला आरक्षण के साथ हैं, लेकिन भाजपाई साजिश के खिलाफ: अखिलेश

अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी महिला आरक्षण के पूर्ण समर्थन में है। उन्होंने कहा, “पूरा देश आधी आबादी के लिए आरक्षण चाहता है। क्या मुस्लिम महिलाएं आधी आबादी के अंतर्गत नहीं आतीं?” उन्होंने दावा किया कि भाजपा उन महिलाओं को सबसे ज्यादा दुख पहुंचाती है जो उसके वादों पर भरोसा करती हैं।

सांसद ने संसद में कहा, “जब हम यहां बहस कर रहे हैं, तो हमारे बगल में 40 हजार लोग सड़कों पर धरने पर बैठे हैं। वहां महिलाएं न्याय की मांग कर रही हैं। हम महिला आरक्षण के साथ हैं, लेकिन भाजपा की साजिश के खिलाफ हैं।”

विशेष सत्र का संदर्भ और बिलों पर चर्चा

सरकार ने महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) में संशोधन से संबंधित तीन बिलों पर चर्चा के लिए बजट सत्र बढ़ाते हुए तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया है। यह सत्र 16 अप्रैल 2026 से शुरू हुआ। अखिलेश यादव ने इस मौके पर भाजपा पर महिलाओं को सिर्फ राजनीतिक नारा बनाने का आरोप लगाया और जाति जनगणना सहित अन्य मुद्दों पर भी जोर दिया।

भाजपा शासित राज्यों में वर्तमान स्थिति

वर्तमान में भाजपा शासित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में महिला मुख्यमंत्री की संख्या शून्य है। दिल्ली में रेखा गुप्ता जैसी महिला नेता भाजपा से जुड़ी रही हैं, लेकिन कुल मिलाकर भाजपा शासित क्षेत्रों में महिला मुख्यमंत्री नहीं हैं। अखिलेश यादव के सवाल ने इस मुद्दे को फिर से राजनीतिक बहस का केंद्र बना दिया है। विपक्षी दलों का कहना है कि आरक्षण का लाभ सभी महिलाओं तक पहुंचना चाहिए, बिना किसी भेदभाव के।

महिला आरक्षण बिल का महत्व

महिला आरक्षण बिल महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान करता है। यह विधेयक लंबे समय से राजनीतिक चर्चा का विषय रहा है। अखिलेश यादव ने संसद में कहा कि भाजपा इसे अपने एजेंडे के लिए इस्तेमाल कर रही है, जबकि वास्तविक सशक्तिकरण के लिए संगठनात्मक स्तर पर बदलाव जरूरी है।