अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ऐतिहासिक वार्ता जारी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ज्यादा अहमियत नहीं देते हुए साफ कहा कि किसी भी नतीजे से अमेरिका को फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उनका देश पहले ही जीत चुका है। व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने यह बयान दिया।
ट्रंप का आत्मविश्वास भरा बयान
ट्रंप ने कहा, "हम बहुत गहरी बातचीत में हैं। देखते हैं क्या होता है। शायद समझौता हो जाए या न हो। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। अमेरिका के नजरिये से हम जीते हैं।" उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान की नौसेना, रडार और वायुसेना नहीं बची है तथा उनके कई नेता मारे जा चुके हैं। ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी सेना होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगों को साफ करने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है।
उन्होंने आगे बताया कि बड़े टैंकरों में तेल और गैस लादकर जहाज अमेरिका की ओर बढ़ रहे हैं। ट्रंप का कहना था कि नाटो से कोई मदद नहीं मिली, फिर भी अमेरिका ने ईरान को सैन्य रूप से हरा दिया है।
पाकिस्तान में जारी ऐतिहासिक वार्ता
रविवार को इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच आमने-सामने की बातचीत हो रही है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, जबकि ईरानी पक्ष की कमान संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ के पास है। यह वार्ता दो हफ्ते पहले घोषित अस्थायी संघर्षविराम के बाद हो रही है।
युद्ध अब सातवें हफ्ते में पहुंच चुका है, जिसमें हजारों लोगों की जान जा चुकी है। लेबनान में इजरायल के हमलों से ईरान समर्थित हिजबुल्ला को भारी नुकसान हुआ है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, वहां मौत का आंकड़ा दो हजार से ज्यादा हो गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति
ट्रंप ने स्वीकार किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी लगभग बंद है। अमेरिकी सेना वहां बारूदी सुरंगों की जांच और सफाई कर रही है। ईरान ने इन सुरंगों को खुद बिछाया था, लेकिन अब उन्हें हटाने में असमर्थ है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान को इन सुरंगों की सही लोकेशन भी पता नहीं चल पा रही।
इस जलडमरूमध्य से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस आयात करता है। इसकी बंदी से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हुए हैं। ट्रंप ने कहा कि समझौता हो या न हो, अमेरिका इस रास्ते को खाली करा लेगा।
चीन को सख्त चेतावनी
ट्रंप ने चीन को भी चेतावनी दी। अगर चीन ईरान को हथियार भेजता है तो उसे बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, "अगर चीन ऐसा करता है, तो चीन को बड़ा नुकसान होगा।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब चीन द्वारा हथियार सप्लाई की कुछ खबरें सामने आई थीं।
ट्रंप ने जोर दिया कि ईरान के पास अब कोई मजबूत सैन्य विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि ईरान कई वर्षों तक शासन करने वाले नेता अब नहीं रहे।
वार्ता के आगे के संभावित नतीजे
वार्ता में संघर्षविराम को स्थायी बनाने, होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलने और प्रतिबंधों में छूट जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। दोनों पक्ष गहरे मतभेदों के बावजूद पाकिस्तान की मध्यस्थता में आगे बढ़ रहे हैं। इजरायल के हमले और लेबनान में जारी तनाव इस प्रक्रिया को चुनौती दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह वार्ता मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने का महत्वपूर्ण मौका है, लेकिन गहरी अविश्वास की दीवार को पार करना आसान नहीं होगा।