वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच भारत सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के निर्यात पर अप्रत्याशित लाभ कर यानी विंडफॉल टैक्स में भारी बढ़ोतरी कर दी है। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार यह कदम तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधाओं के कारण तेल बाजार अस्थिर है, जिससे घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और रिफाइनरियों के अतिरिक्त मुनाफे पर नियंत्रण रखने का प्रयास किया जा रहा है।

नई टैक्स दरें: डीजल और एटीएफ पर सख्ती

सरकार ने डीजल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स को 21.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 55.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। इसी तरह एटीएफ पर यह दर 29.5 रुपये से बढ़ाकर 42 रुपये प्रति लीटर हो गई है। हालांकि पेट्रोल के निर्यात पर कोई टैक्स नहीं लगाया गया है और छूट बरकरार रखी गई है।

यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब मार्च के अंत में पहले टैक्स लगाया गया था, लेकिन वैश्विक कीमतों में लगातार उछाल को देखते हुए दरों में और इजाफा जरूरी हो गया। भारत दुनिया का बड़ा रिफाइनिंग केंद्र है और एटीएफ का शुद्ध निर्यातक देश है। निर्यात पर सख्ती से घरेलू बाजार में ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

ईरान युद्ध और वैश्विक तेल बाजार पर असर

ईरान युद्ध ने होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल और गैस आपूर्ति को प्रभावित किया है। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे रिफाइनरियों को निर्यात पर ज्यादा मुनाफा हो रहा था। सरकार ने इसे रोकने के लिए विंडफॉल टैक्स को मजबूत किया है ताकि रिफाइनरी कंपनियां घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दें।

इससे पहले मार्च 2026 में टैक्स लगाया गया था, जो हर पखवाड़े समीक्षा के अधीन रहता है। नई दरें अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के अनुरूप हैं और घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर रखने में सहायक साबित होंगी।

विमानन क्षेत्र पर बढ़ता दबाव

उच्च कच्चे तेल की कीमतों से एटीएफ की लागत बढ़ रही है। भारत एटीएफ का बड़ा उपभोक्ता और निर्यातक दोनों है। बढ़ती ईंधन लागत का बोझ सीधे एयरलाइंस पर पड़ रहा है, जो आगे चलकर हवाई किरायों में इजाफे का कारण बन सकता है। आम यात्रियों पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका है।

विशेषज्ञों का कहना है कि विमानन क्षेत्र पहले से ही मार्जिन दबाव झेल रहा है। ईरान संकट से उड़ान मार्गों में बदलाव और ईंधन की महंगाई दोनों चुनौतियां पैदा कर रहे हैं। सरकार इस स्थिति पर नजर रखे हुए है।

सरकार के राहत उपाय: यात्रियों और एयरलाइंस को बचाने की तैयारी

नागरिक उड्डयन मंत्रालय विभिन्न विभागों के साथ समन्वय कर रहा है। एटीएफ पर राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले वैट में कटौती का विकल्प तलाशा जा रहा है। महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे बड़े बाजारों में जहां मेट्रो एयरपोर्ट्स पर ईंधन महंगा है, इस पर विशेष ध्यान है।

इसके अलावा हवाई अड्डा शुल्कों की समीक्षा भी की जा रही है। एयरलाइंस और हवाई अड्डा संचालकों से बातचीत चल रही है ताकि उच्च ईंधन लागत की कुछ भरपाई शुल्कों में कमी से हो सके। केंद्र सरकार का लक्ष्य एयरलाइंस, यात्रियों और संचालकों के हितों में संतुलन बनाना है।

भविष्य की चुनौतियां और संभावनाएं

जब तक वैश्विक अस्थिरता बनी रहेगी, तेल की कीमतें ऊंची रह सकती हैं। रिफाइनरियों के मार्जिन पर कैप लगाने जैसे अतिरिक्त कदम भी उठाए जा रहे हैं ताकि घरेलू बाजार में नुकसान की भरपाई हो सके।

सरकार के इन सक्रिय उपायों से उम्मीद है कि हवाई यात्रा की लागत नियंत्रण में रहेगी। हालांकि लंबे समय तक संकट बने रहने पर और बड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं।