नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी तनाव और ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। इसका सीधा असर भारत में ईंधन दरों पर पड़ रहा है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल के साथ इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) ने इंडस्ट्रियल डीजल को दिल्ली में 87.67 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 109.59 रुपये प्रति लीटर कर दिया है, यानी करीब 22 रुपये की वृद्धि। यह बदलाव 20 मार्च 2026 से लागू हो गया है। हालांकि सामान्य पेट्रोल और डीजल की कीमतें अभी स्थिर बनी हुई हैं।
क्यों बढ़ी इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतें?
वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड और WTI क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं। मध्य पूर्व में संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण रास्तों पर तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। भारत 88 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर यहां सीधा दिखता है। कंपनियों ने इस वैश्विक उछाल को ध्यान में रखते हुए बल्क या इंडस्ट्रियल डीजल की दरें संशोधित की हैं। अन्य शहरों में भी समान बढ़ोतरी देखी गई है, जैसे मुंबई में 90.39 से 113.11 रुपये, कोलकाता में 92.30 से 114.27 रुपये और चेन्नई में 92.54 से 113.38 रुपये प्रति लीटर।
इंडस्ट्रियल डीजल क्या है और इसका उपयोग कहां होता है?
इंडस्ट्रियल डीजल, जिसे बल्क डीजल भी कहते हैं, सामान्य वाहनों में इस्तेमाल नहीं होता। यह मुख्य रूप से फैक्टरियों, कारखानों, शॉपिंग मॉल, डेटा सेंटर्स और बड़ी इमारतों में बैकअप जेनरेटर के लिए प्रयोग होता है। निर्माण क्षेत्र में JCB, बुलडोजर जैसी हैवी मशीनों और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में भी इसका बड़ा उपयोग है। इस पर कोई सब्सिडी नहीं मिलती, इसलिए बाजार दरों के अनुसार ही बिकता है। इस बढ़ोतरी से उत्पादन लागत बढ़ेगी और कंपनियां इसे उत्पादों की कीमतों में समाहित कर सकती हैं।
प्रीमियम पेट्रोल में भी आई बढ़ोतरी
साथ ही कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में 2 से 2.35 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया है। दिल्ली में XP95 जैसी प्रीमियम वैरायटी अब 101.89 रुपये प्रति लीटर हो गई है। यह बढ़ोतरी BPCL की स्पीड, HPCL की पावर और IOC की XP95 पर लागू हुई है। हालांकि सामान्य पेट्रोल और डीजल की दरें अपरिवर्तित हैं, जो उपभोक्ताओं के लिए कुछ राहत की बात है।
आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
भले ही इंडस्ट्रियल डीजल सीधे आम वाहनों में न जलता हो, लेकिन इसका प्रभाव अप्रत्यक्ष रूप से सभी पर पहुंचेगा। उद्योगों की बढ़ती लागत से माल ढुलाई, बिजली उत्पादन और निर्माण कार्य महंगे होंगे। इससे रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं और महंगाई का दबाव बढ़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक तनाव लंबा चला तो ईंधन दरों में और उतार-चढ़ाव संभव है।
निष्कर्ष: वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच इंडस्ट्रियल डीजल की यह भारी बढ़ोतरी उद्योग जगत के लिए चुनौती बनी है। सरकार और कंपनियां स्थिति पर नजर रख रही हैं, लेकिन आम आदमी को महंगाई के रूप में इसका बोझ उठाना पड़ सकता है। समय रहते ऊर्जा सुरक्षा और आयात निर्भरता कम करने की जरूरत है।
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