प्रयागराज में घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की बुकिंग के लिए लागू नए नियम ने हजारों परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर दिया है। केंद्र सरकार द्वारा पेश नए प्रावधान के अनुसार अब एक सिलेंडर की डिलीवरी के बाद अगली बुकिंग के लिए कम से कम 25 दिन का इंतजार करना अनिवार्य हो गया है। यह बदलाव मुख्य रूप से जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग रोकने के उद्देश्य से किया गया है, लेकिन बड़े और संयुक्त परिवारों के लिए यह बड़ी मुश्किल खड़ी कर रहा है। गृहिणियां अब गैस खत्म होने के डर से जूझ रही हैं और घर की रसोई पर संकट मंडरा रहा है।
नया नियम क्या है और क्यों लागू हुआ?
पेट्रोलियम मंत्रालय ने हाल ही में एलपीजी सिलेंडर बुकिंग की समयसीमा बढ़ाई है। पहले यह अंतराल 21 दिन था, लेकिन अब शहरी क्षेत्रों में इसे 25 दिन कर दिया गया है। ग्रामीण इलाकों में यह अवधि 45 दिन तक बढ़ाई गई है। सरकार का कहना है कि वैश्विक संकट और मध्य पूर्व में तनाव के कारण आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। पैनिक बुकिंग रोकने और गैस का समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया। प्रयागराज जैसे शहरों में जहां संयुक्त परिवार आम हैं, यह नियम सबसे ज्यादा असर डाल रहा है।
बड़े परिवारों पर सबसे अधिक असर
शहर के कई मोहल्लों में 6 से 10 सदस्यों वाले परिवारों में एक सिलेंडर मुश्किल से 18-22 दिन चल पाता है। पहले वे समय से पहले ही दूसरा सिलेंडर बुक कर लेते थे, लेकिन अब 25 दिन की अनिवार्य प्रतीक्षा के कारण गैस खत्म होने से पहले नया सिलेंडर नहीं मिल पाता। डिलीवरी में डीएसी नंबर, पर्ची कटने और पहुंचने तक कुल 28 दिन लग सकते हैं। इससे कई घरों में खाना बनाने में कठिनाई हो रही है। गृहिणियां बताती हैं कि अब हर रोज सोचना पड़ता है कि क्या बनाना है और कितना बनाना है।
खानपान में बदलाव और महिलाओं की चिंता
गैस की अनिश्चितता के कारण परिवारों ने खानपान में कटौती शुरू कर दी है। सुबह का नाश्ता हल्का किया जा रहा है, चाय की संख्या कम हुई है और कुछ व्यंजनों को बंद करना पड़ रहा है। बच्चों और बुजुर्गों के पोषण पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। प्रयागराज की राधा साहू कहती हैं, “हमारे घर में आठ लोग हैं। पहले सिलेंडर 20 दिन में खत्म होता था और दूसरा तुरंत मिल जाता था। अब 25 दिन तक बुकिंग नहीं हो सकती। नियम बदलना चाहिए।” सुधांजलि श्रीवास्तव ने कहा, “गैस बचाने के लिए विवशता में कई चीजें बंद करनी पड़ रही हैं। समयसीमा 18-20 दिन करनी चाहिए।” रश्मि और निशा ने भी सरकार से बड़े परिवारों के लिए अलग नियम बनाने की मांग की है।
वैकल्पिक उपकरणों की मांग में उछाल
गैस संकट की आशंका से बाजार में इंडक्शन चूल्हा, इलेक्ट्रिक कुकर और हीटर की बिक्री 20-30 प्रतिशत तक बढ़ गई है। दुकानदारों का कहना है कि लोग वैकल्पिक साधनों की ओर रुख कर रहे हैं। हालांकि बिजली कटौती और महंगे बिजली बिल के कारण सभी परिवार इन्हें अपनाने में सक्षम नहीं हैं। कई लोग अभी भी पारंपरिक गैस पर निर्भर रहना चाहते हैं।
निष्कर्ष: नए नियम से संयुक्त और बड़े परिवारों की रसोई पर असर साफ दिख रहा है। सरकार का उद्देश्य आपूर्ति संतुलित रखना है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इससे उत्पन्न परेशानियां गंभीर हैं। महिलाओं की मांग है कि परिवार के आकार के आधार पर लचीलापन बरता जाए ताकि घरेलू रसोई सुचारु रूप से चल सके।